रेडियो से पॉडकास्ट तक: सुनने की आदत फिर लौट रही है
सफ़र हो या घर का काम — लोग अब कानों से कहानियाँ, खबरें और जानकारी सुनना पसंद कर रहे हैं।
एक दौर था जब घर-घर में रेडियो पर गाने और खबरें सुनी जाती थीं। टीवी और मोबाइल वीडियो के आने के बाद लगा कि सुनने का ज़माना पीछे छूट गया, लेकिन पॉडकास्ट ने यह आदत फिर लौटा दी है।
पॉडकास्ट की खासियत है कि इसे काम करते हुए, सफ़र में या टहलते समय भी सुना जा सकता है। हिंदी में कहानियाँ, इतिहास, करियर, सेहत और बिज़नेस जैसे विषयों पर बड़ी संख्या में पॉडकास्ट उपलब्ध हैं।
एफ़एम रेडियो भी आज शहरों में खूब सुना जाता है, खासकर गाड़ी चलाते समय। आवाज़ का यह माध्यम आने वाले समय में और लोकप्रिय होने की उम्मीद है।





