भारतीय सिनेमा का सफ़र: मूक फ़िल्मों से आज के OTT दौर तक
सौ साल से ज़्यादा पुराने भारतीय सिनेमा ने तकनीक और कहानी, दोनों में लंबा सफ़र तय किया है।
भारतीय सिनेमा की शुरुआत साल 1913 में दादासाहेब फाल्के की फ़िल्म "राजा हरिश्चंद्र" से मानी जाती है। यह एक मूक फ़िल्म थी, जिसमें संवाद की जगह दृश्य और लिखे हुए शब्द होते थे।
साल 1931 में "आलम आरा" के साथ भारत में बोलती फ़िल्मों का दौर शुरू हुआ। इसके बाद ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन फ़िल्में, फिर डिजिटल तकनीक और अब OTT प्लेटफ़ॉर्म — सिनेमा लगातार बदलता रहा है।
आज भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा फ़िल्में बनाने वाले देशों में गिना जाता है। हिंदी के साथ-साथ दक्षिण भारतीय और क्षेत्रीय भाषाओं की फ़िल्में भी देश-विदेश में खूब पसंद की जा रही हैं। भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान "दादासाहेब फाल्के पुरस्कार" इसी महान फ़िल्मकार के नाम पर दिया जाता है।





